रिकॉर्ड करने की तकनीक
प्रलेखन कार्य शुरु- शुरु में फिल्म की रील पर रिकॉर्ड किया जाता था। उस्ताद हाफिज़ अली खान, टी चौडियाह सरीखे अन्य महान कला-गुरुओं की रिकॉर्डिंग इसी प्रकार से की जाती थी। बाद में इन रिकॉर्डिंग को दूसरी टेप पर परिवर्तित किया गया। कुछ समय बीतने पर इस तकनीक को चौथाई इंच की मैग्नेगटिक टेप पर परिवर्तित किया गया।

सिनेमा की सामग्री के अभिलेखन में पहले 16 मि.मी. पर रंगीन फिल्में आगे-पीछे दोनों ओर से तैयार की जाती थीं। 1950 के दशक में गणतन्त्र दिवस की परेड और लोक नृत्य उत्सव का फिल्मांकन, अकादेमी के प्रलेखन इकाई का नियमित क्रियाकलाप था। इसीलिए उस वक्त के लोक नृत्यों की समृद्ध परंपरा का संपूर्ण संग्रह अकादेमी के पास सुरक्षित है। बाद में इस फॉर्मेट को 16 मि.मी. ब्लैक एण्ड व्हाइट और रंगीन फिल्मों के नेगेटिव में परिवर्तित कर प्रिन्ट भी तैयार किए गए। चूंकि उस समय 16 मि.मी. की फिल्मों का पूरा फिल्मांकन गैर समक्रमिक कैमरों पर नहीं की जाती थी, अत: केवल मूक फिल्में ही बन पाती थीं, हांलाकि बहुत बार फिल्मांकन के दौरान आवाज़ भी रिकार्ड की जाती थी। मई 1979 से दिसम्बर 1980 तक प्रलेखन के लिए ध्वनि और फिल्म की साथ-साथ रिकॉर्डिंग के लिए गैर व्यवसायिक सुपर 8 साउंड फिल्म का प्रयोग किया गया। तदनंतर प्रलेखन इकाई ने एक 16 एम एम की एक व्यायवसायिक सिंक साउन्ड कैमरे के साथ मेल्ट्रॉन (नागरा) सिंक रिकॉर्डर भी खरीद लिया। सन् 1981 से अकादेमी ने यू-मैटिक लो बैन्ड फार्मेट में रिकॉर्डिंग शुरु की जिसे बाद में 1991 में हाई बैन्ड में अपग्रेड किया गया। इसी समय में ही श्रव्य रिकॉर्डिंग के लिए डीएटी (DAT) की शुरुआत हुई। कभी- कभी कार्यशालाओं और गोष्ठियों में एसवीएचएस, वीएचएस फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाने लगा।
1999 में फिर से वीडियों फॉर्मेट को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त बीटा (BETA) फॉर्मेट में बदला गया और प्रलेखन अनुभाग ने वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए 2001 में डीवीसीएएम फॉर्मेट का इस्तेमाल करके डिजिटल तकनीक को अपना लिया।
फोटोग्राफी के मामले में शुरुआत में 120 साइज़ के ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन नेगेटिव, 120 साइज़ के रंगीन स्लाइड फॉर्मेट का इस्तेमाल प्रलेखन के लिए किया जाता था। 35 मि.मी. के ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन नेगेटिव/स्लाइड/स्टिल फिल्में नेगेटिव फॉर्मेट में और खरीदी गईं। 6x7 सेमी. साईज़ का बड़ा फॉर्मेट भी ब्लैक एंड व्हाइट और कलर स्टिल फोटोग्राफी के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए हैसलब्लैड, ममिया और ब्रोनिका कैमरे के प्रयोग किए गए। वर्तमान में फोटोग्राफी डिजिटल फॉर्मेट में की जाती है।