पुतुलकला का संरक्षण तथा संवर्धन
पुतुलकला की संवर्धन एंव संरक्षण योजना के तहत उड़ीसा के धागा पुतुल, पश्चिम बंगाल के छड़ पुतुल, कर्नाटक और केरल के छाया पुतुल के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विगत वर्षों में अकादेमी के संग्रहालय में देश के विभिन्न भागों से बहुत से पुतुल प्राप्त हुए हैं। पारम्परिक पुतुलकारों के प्रदर्शनों को प्रायोजित करना एवं उन्हें समर्थन देना भी इस योजना का उद्देश्य है।
संगीत नाटक अकादेमी, ग्रामीण एवं अर्द्धविकसित शहरों में पारम्परिक पुतुल कला के कार्यक्रम प्रायोजित करती है। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के चुने गए पुतुल समूहों को एक वर्ष में पाँच प्रदर्शनों तक प्रदर्शन फीस दिए जाने का प्रावधान है। राज्य सरकार की एजेंसियां या पुतुल कला के लिए कटिबद्ध प्रतिष्ठित संस्थाएं इनका आयोजन करवायेंगी। प्रदर्शन के प्रमाण प्रस्तुत करने पर राज्य सरकार की एजेंसियां इन पुतुलकारों को राशि का भुगतान करेंगी।
(क) प्रस्तुतिपरक पुतुल रंगमंच कार्यशाला
विगत कुछ वर्षों से अकादेमी ने भिन्न-भिन्न राज्यों में पुतुल कार्यशालाओं का आयोजन किया। इन कार्यशालाओं की तीन श्रेणियां हैं:
i) पारम्परिक पुतुलकारों को और अधिक प्रस्तुतिपरक बनाने के दृष्टिकोण से समसामयिक और पारम्परिक दोनों पुतुलकारों के लिए प्रयोगात्मक कार्यशाला।
ii) शिक्षा जगत में पुतुलकला की संभावनाएं विकसित करने के उद्देश्य से पुतुलकला में रुचि रखने वाले प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए शैक्षणिक पुतुलकला कार्यशाला।
iii) नाटकों के मंचन के साथ पुतुल का समावेश हो सके, इस दृष्टिकोण से रंगकर्मियों को प्रोत्साहित करने और युवा रंगकर्मियों को समसामयिक पुतुल तकनीक सीखने के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पुतुलकला कार्यशाला।
रंगकर्मियों की कार्यशाला अन्य कार्यशालाओं के मुकाबले अधिक प्रभावी रहीं। इसलिए नियमित रूप से इस दिशा में कार्यरत कुछ समसामयिक नाट्य समूहों का चयन किया जाए, उनके लिए पुतुल कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए और उन्हें लगातार पाँच वर्षों के लिए लगातार वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
1) उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य है- पुतुल कला के पारम्परिक और भिन्न-भिन्न रूपों का उन्नयन एवं परिरक्षण, तथा सामाजिक और आर्थिक बदलाव के दौर में लुप्त हो रहे पुतुलों के रूपों को नए सिरे से तलाशना और समसामयिक पुतुल समूहों और पुतुलकारों को समर्थन देना।
2) विस्तार
क) देश के विभिन्न भागों में पारम्परिक और समसामयिक पुतुल प्रदर्शनों का प्रायोजित करना।
ख) शिक्षण और प्रस्तुतिपरक कार्यशालाओं का आयोजन करना।
ग) पुतुल कला के वार्षिक उत्सवों का आयोजन करना।
घ) देश-विदेश के विभिन्न भागों में पुतुल प्रदर्शनियों का आयोजन करना।
ङ) पुतुल संस्थाओं और प्रदर्शन कार्य में जुटी संस्थाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना।
च) पुतुल कला पर साहित्य का प्रकाशन और श्रव्य/दृश्य फिल्मों द्वारा पुतुल कला का प्रचार-प्रसार करना।
3) दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्राप्त मुख्य उपलब्धियों और चालू वित्त वर्ष के अपेक्षित लक्ष्यों का विवरण।
दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान न केवल देश में अपितु विदेशों में भी कई पुतुल प्रदर्शनियों- ‘पुतुल यात्रा’ का आयोजन किया गया। पारम्परिक पुतुल के तहत पुतुल कार्यशालाओं का आयोजन किया गया जिसमें पुतुल निर्माण और पुतुल संचालन की तकनीक सिखाई गई। दिल्ली, मुम्बई और लखनऊ में पुतुल की बड़ी प्रदर्शनियां लगाई गईं।
प्रत्येक वर्ष 25 पुतुल समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
4) ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजनाः ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इस योजना को वृहद रूप से जारी रखा जाएगा। इस योजना में अभिकल्पित अन्य नियमित गतिविधियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों और विदेशों में बड़े स्तर पर पुतुल प्रदर्शनियॉ आयोजित करने का प्रस्ताव है। प्रयोगात्मक पुतुल नाटकों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी इस योजना का उद्देश्य है।