युवा रंग कर्मियों को सहायता योजना
शास्त्रीय नृत्य की पारम्परिक शैली से पृथक भारतीय नृत्य की समकालीन अभिव्यक्ति को विशिष्ट रूप में विकसित करने के लिए महान कलाकार व्यक्तिगत रूप से प्रयासरत रहे हैं, उदय शंकर, रामगोपाल जैसे दिग्गज कलाकारों के महत्वपूर्ण कार्यों के साथ इस की शुरुआत हुई। विगत दशकों में कुछ समर्पित और प्रतिभाशाली कलाकारों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है तथा उनके काम को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी सराहा गया है। श्रेष्ठ संगीतकारों द्वारा रचनात्मक/ प्रयोगात्मक प्रकृति के संजीदा अव्यावसायिक कला के क्षेत्र में भी इसी प्रकार के प्रयास किये गये हैं। इन प्रमुख संगीतकारों में से कुछ को हाल ही में सम्मानित किया गया है। यह देखा गया है कि उनके द्वारा सूत्रपात की गयी प्रणाली के अनुरुप बड़ी संख्या में युवा कलाकार काम कर रहे हैं। उनमें से कुछ तो इस क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ने में सफल भी हो गये हैं। प्रायोजित और सृजनात्मक काम को करने के लिए समय, संसाधन और प्रतिभाशाली लोगों की अत्यन्त आवश्यकता है जो एक जुट हो कर प्रमुख रूप से सामूहिक कृतियों का निर्माण कर सकें। हालांकि संगीत और नृत्य के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में जीविका और पर्याप्त समर्थन प्रदान करने के लिए हमारे पास कोई साधन या योजना नहीं है, इसलिए इस विशिष्ट योजना को आरम्भ करने की जरूरत थी।
उल्लेखनीय है कि भारत की राष्ट्रीय अकादेमियों और एन. एस. डी. के कार्यों की समीक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा श्री पी. एन. हक्सर की अध्यक्षता में नियुक्त उच्च स्तरीय समिति ने यह सिफारिश की थी कि संगीत नाटक अकादेमी या तो नृत्य संरचनाकारों को प्रत्यक्षतः समर्थन दे अथवा किसी ऐसे संस्थान की स्थापना करे जिसे प्रशिक्षण और प्रदर्शन के अवसर प्राप्त हों। हमारा विचार है कि इस तरह के प्रायोगिक, सृजनात्मक और वैयक्तिक प्रकृति के कार्य को देखते हुए, सार्वजनिक धन से एक केन्द्रीय संस्था स्थापित करने के बजाय विभिन्न व्यक्तियों/ समूहों को समर्थन प्रदान करना बेहतर होगा। इस तरह की योजना आवश्यक समर्थन देने के साथ-साथ स्वतंत्र केन्द्रों के व्यक्तियों की कलात्मक अभिव्यक्तियों को भी प्रोत्साहित करेगी।
यह योजना नृत्य संरचनाकारों/ संगीतकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ नृत्य संरचनाकारों, प्रकाश सज्जाकारों, दृश्य सज्जाकारों, वेश-विन्यासकारों, संगीत रचनाकारों, गीतकारों, संगीत संचालकों, पटकथा लेखकों के बीच आवश्यक संवाद को भी संभव बनाएगी।
i) उद्देश्य- इस योजना की शुरूआत इस व्यापक उद्देश्य से 1984 में की गई थी कि राष्ट्रव्यापी नाट्य आन्दोलन के लिए युवा रंगकर्मियों के सृजनात्मक कार्यों और ऊर्जा को पर्याप्त समर्थन और संरक्षण प्राप्त हो।
ii) कार्य क्षेत्र- इस योजना के तहत राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर युवा निर्देशकों के समारोह आयोजित किए जाते हैं, नाटक में प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, युवा कलाकारों को महान रंगकर्मियों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है और प्रख्यात निर्देशकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
iii) दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान प्राप्त प्रमुख उपलब्धियां और चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्याशित लक्ष्य
कलाकारों को नाटक में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अकादेमी ने विगत पांच वर्षों के दौरान दो चरणों में कार्यशालाओं का संचालन किया है। पहले चरण में नाटक के सभी पहलुओं पर प्रारम्भिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। दूसरे चरण में उन्हें नाटक में गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया ताकि वह अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने में सक्षम हों।
आवासीय नाटक कार्यशालाएं मणिपुर, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू व कश्मीर, हरियाणा और संघ राज्य चंडीगढ़, उत्तरांचल, झारखंड, सिक्किम, उड़ीसा,पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आयोजित की गईं और इन कार्यशालाओं के माध्यम से युवा कलाकारों में नाटकों में रुचि उत्पन्न की गई। लगभग 400 कलाकारों ने इन कार्यशालाओं में सहभागिता की और 50 कलाकारों ने गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया जो कि अब व्यवसायिक नाटक कलाकार के रुप में कार्यरत हैं। उत्तर व पूर्व में 75 दिन की दो क्षेत्रीय कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया। मणिपुर, असम, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड, सिक्किम, मध्य प्रदेश, केरल और गुजरात में युवा निर्देशकों के लिए एक समारोह आयोजित किया गया जिसमें 75 युवा निर्देशक लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, त्रिपुरा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, जम्मू व कश्मीर में संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
iv) ग्यारहवीं योजना के लिए अभिकल्पना
इस योजना को आगामी 5 वर्षों के लिए जारी रखा जाएगा जिसमें 4 कार्यशालाएं, 5 समारोह, 4 संवाद कार्यक्रम और प्रति वर्ष 25 कलाकारों को विशेषज्ञों के अधीन गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।