Himachal Ke Prachint Sangeet Vadya : By Nand Lal Garg

हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक कला संस्कृति का अपना एक विशेष स्थान है| ऋषियों की इस तपोभूमि में कैलाशपति नटराज शिव ने ही प्रथम वाद्य डमरू का अविष्कार किया, इसके अतिरिक्त ऋषियों-मुनियों के निवास स्थान हिमाचल प्रदेश में किन्नर ऋषि द्वारा किन्नरी वीणा तथा तूम्ब्रू ऋषि द्वारा तम्बूरा आदि का अविष्कार किया गया, ऐसा जनमानस का विश्वास है| ऋषियों की वंश परंपरा से संबंध रखने वाले इस पर्वतीय क्षेत्र् के व्यवसायिक वाद्य कलाकार विभिन्न उत्सवों में अपनी संगीत कला का प्रदर्शन करते हैं| ये पारंपरिक वाद्य काष्ठ, मिट्टी, चाँदी, पीतल, धातु के अतिरिक्त मनुष्य की हड्डी तक से भी निर्मित हैं| इस पुस्तक में वाद्यों की ऐतिहासिक जानकारी, विभिन्न अवसरों से उनका संबंध, इनकी वादन विधि, इन पर बजने वाले प्रमुख एवं दुर्लभ तालों का परिचय ताल लिपि सहित दिया गया है| इसमें संगीत वाद्यों के वादक कलाकारों के संक्षिप्त परिचय सहित हिमाचल की भाषा, बोली, कला संस्कृति, रीति रिवाज़ तथा भौगोलिक स्थिति का विस्तृत समावेश है| पारंपरिक संगीत वाद्यों पर लिखित इस प्रकार की यह प्रथम पुस्तक है|


साईज 150 x 225 मि.मी., मूल्य 400 रु
प्रथम संस्करण 2009