परंपरागत, लोक संगीत और जनजातीय कला प्रदर्शन का प्रशिक्षण और संरक्षण
उद्देश्य
योजना के व्यापक उद्देश्य हैं:
(i) प्रख्यात गुरुओं की निगरानी में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संगीत, नृत्य और नाट्यकला के साथ प्रदर्शन कला से जुड़े शिल्प को पहचान दिलाने के लिए सहायता एवं सहयोग प्रदान करना।
(ii) पारंपरिक रुप से अभ्यासरत परिवारों के युवा सदस्यों और जो लोग कला को अपने पेशे के रूप में आगे ले जाने की योजना बना सकते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना।
(iii) इस तरह के रूप, शैली, परंपराओं, घरानों, निर्वासितों आदि की सहायता करना जिन्हें सामान्यता किसी प्रकार का प्रोत्साहन नहीं मिलता।
(iv) भारत की प्रदर्शन कला की विभिन्न समृद्धि का संरक्षण करने के लिए उनके प्रशिक्षण और कार्य की गतिविधियों को उचित समर्थन देना।
(v) निर्धारित कला के प्रारूपों के प्रशिक्षण का मानक एक बनाए रखना और पुरानी पीढ़ी की सीख युवा पीढ़ी तक समुचित तरीके से हस्तांतरित हो सके ये सुनिश्चित करना।

विस्तार
उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा की प्रथा को गैर-औपचारिक और व्यक्तिगत वातावरण में पूरे देश के संगीत, नृत्य, थिएटर सहित प्रदर्शन कला से जुड़े शिल्प और संबद्ध कला को प्रशिक्षण के लिए विशेष ध्यान के साथ समर्थन देना। यह योजना प्रदर्शन, कार्यशालाओं, संगीत वाद्ययंत्र और शिल्प से संबंद्धित पारंपरिक कलाओं की प्रदर्शनियों का समर्थन करती है। यह योजना कुछ रूपों में अल्पकालीन गहन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी समर्थन करती है।

चयन

  1. प्रशिक्षुओं का चयन निर्धारित गुरु/ संस्था के विचार विमर्श और सामान्य रूप से अकादेमी द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समितियों द्वारा लिए गए ऑडिशन/ साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा।
  2. सामान्य रूप से 10-35 वर्ष की आयु वर्ग के प्रमाणित क्षमताओं वाले व्यक्ति प्रशिक्षण प्राप्त करने के पात्र होंगे। किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षुओं की संख्या चयन समिति द्वारा निर्धारित की जाएगी और वह व्यक्तिगत रुप से सावधानी सुनिश्चित करेगी।

अवधि/ जांच/ मूल्यांकन
प्रारंभिक अवधि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एक वर्ष का होगा लेकिन वार्षिक आधार पर उचित मूल्यांकन के बाद प्रशिक्षण को एक साल और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि सामान्यतः प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल पांच साल की अवधि से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।
1. समय-समय पर प्रत्येक प्रशिक्षु की प्रगति रिपोर्ट गुरु/ संस्था द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। एक साल के प्रशिक्षण के अंत में एक समग्र रिपोर्ट मूल्यांकन समिति को विचार के लिए दी जाएगी।
वित्तीय प्रावधान

  1. गुरुओं का मासिक मानदेय और प्रशिक्षुओं के वज़ीफे का निर्णय प्रशिक्षण कार्यक्रम/ परियोजना की प्रकृति और अवधि के आधार पर चयन/ मूल्यांकन समिति द्वारा लिया जाएगा। यह निम्नलिखित क्रम में होगी।

गुरु: 1500 से 3000 रुपये के बीच
प्रशिक्षु: 300 से 1000 रुपये के बीच
2. आवश्यक सामग्री जैसे संगीत उपकरण, वेशभूषा और मेकअप, कच्चे माल, औजार या अन्य वस्तु जिसकी अनुशंसा गुरु या समिति द्वारा की गई हो, की खरीद के लिए कोष का प्रावधान होगा जो अकदामी द्वारा प्रदान की जाएगी। ऐसे मामलों में एक साल का व्यय 25,000 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
3. अकादेमी के मानदंडों के अनुसार ऑडिशन/ मूल्यांकन समिति की बैठकों में भाग लेने और जरूरत पड़ने पर उपस्थित रहने के उद्देश्य से गुरुओं और प्रशिक्षुओं की यात्रा का और दैनिक भत्ते का भुगतान किया जाएगा।
उचित मामलों में अकादेमी के सचिव चयन समिति/ उपाध्यक्ष के साथ विचार-विमर्श करके कुछ शर्तों में छूट दे सकते हैं।