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प्रकाशन

प्रकाशन

संगीत नाटक अकादेमी के प्रकाशन अनुभाग के कार्यकलाप इस प्रकार हैं (क) प्रकाशन समिति द्वारा अनुमोदित पुस्तकों का प्रकाशन करवाना (ख) अकादेमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘संगीत नाटक’ का प्रकाशन करना, (ग) लेखकों, सम्पादकों और व्यावसायिक प्रकाशकों को प्रदर्शन कलाओं की पुस्तकों और पत्रिकाओं के प्रकाशन में आर्थिक सहायता प्रदान करना, (घ) प्रकाशित पुस्तकों पर शोध कार्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना। पाण्डुंलिपियों का आकलन, सम्पादन और प्रकाशित सामग्री का प्रोडक्शन, बिक्री और स्टॉक का प्रबन्धरन आदि कार्य भी इसमें शामिल हैं।

सम्प्रति अकादेमी की लगभग 50 पुस्तकें हैं। 1965 से शुरू किए गए जर्नल ‘संगीत नाटक’ की सूची में वर्णित पिछले जर्नल अकादेमी में उपलब्ध‍ हैं। संगीत नाटक अकादेमी द्वारा प्रदत्त अनुदान से भारत की प्रमुख भाषाओं में छपाई गई अन्य प्रकाशकों की कई सौ पुस्तनकें और पत्रिकाएं भी सम्मिलित हैं।

उपरिवर्णित कार्यों के अतिरिक्तम प्रकाशन अनुभाग अकादेमी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिए तैयार साहित्य, ब्रोशर, अकादेमी सम्मान के लिए प्रशस्ति-पत्र, समारोह-आयोजनों के लिए भाषण और अन्यय संप्रेषण के लिए अप्रकाशित सामग्री तैयार करने में भी सदैव मददगार रहा है।

अन्य कार्य
लगभग 60 अप्राप्य पुस्तकों का प्रकाशन और संगीत नाटक पत्रिका की सूची अकादेमी के प्रकाशन का एक साधारण कार्य है।

प्रकाशन ही मुख्य गतिविधि है और सम्पर्क सूत्रों की कमी के कारण पुस्त कों के प्रकाशन और वितरण कम हुए हैं।
विगत कुछ वर्षों में इस संबंध में बहुत महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं संगीत नाटक अकादेमी के पूर्व अध्यरक्ष स्वर्गीय राम निवास मिर्धा जी ने इस विषय में पहल की। अकादेमी अब प्रकाशन उद्योग में अग्रसर हो पुस्तक मेलों में प्रदर्शनी के ज़रिए पुस्तकों का प्रचार करती है। इस प्रकार की पहल से पुस्तकों की खरीद तो बढ़ी है ही साथ ही साथ पुस्तक व्यवसाय में भी प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है। वित्त वर्ष 2009-10 में संगीत नाटक अकादेमी ने निजी सैक्टर के प्रकाशकों के सहयोग से 6 पुस्तुकें प्रकाशित कर एक रिकार्ड बनाया है। इन पुस्तकों के नाम हैं :

हिन्दुस्तानी म्यूजि़क एण्डं ऐस्थेटिक्स टुडे :ए सलेक्टिव स्टडी, एवेन्यूज़ टू ब्यूटी : एट ऐसेज़ इन ऐस्थेटिकस, एण्ड हिन्दु‍स्तानी संगीत : सम पर्सपेक्टिव्स, सम पर्फोमर्स, एस के सक्सेना द्वारा लिखित; टैम्पल म्यूजि़क इन्स्ट्रूमेंट्स ऑफ केरल – एल एस राजागोपालन द्वारा लिखित, हिमाचल के प्राचीन वाद्य-नन्द‍ लाल गर्ग द्वारा लिखित और इंडियन सिनेमा इन रेट्रोस्पेक्ट–संपादन– आर एम रे (यह पुस्तक अकादेमी के 1955 में आयोजित फिल्म‍ सेमिनार के लेखों का संग्रह है और पिछले संसकरण का पुनर्मुद्रण है)

इसके साथ ही प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में पुस्तुकों के प्रचार प्रसार के लिए अकादेमी ने एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जो कि फेंडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स की सहायता से आयोजित की गई थी जिसमें संगीत, नृत्यं और नाटक की पुस्तकों की बिक्री भी की गई थी। इस प्रदर्शनी का नाम था ‘पर्फोरमेन्सल एण्ड द प्रिन्टिड वर्ल्ड ’।

प्रदर्शनी और पुस्तगकों के बीच तादात्मय स्थापित करने के उद्देश्य से यह प्रदर्शनी लगाई गई थी और संगीत, नृत्य और नाटक में मनोरंजन और प्रदर्शन में किताबों के माध्य म से लाभान्वित करने का मार्गदर्शन किया गया था।