संग्रहालय
संगीत नाटक अकादेमी का प्रमुख उद्देश्य भारत में प्रदर्शन कलाओं का संरक्षण और संवर्द्धन करना है। अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अकादेमी की विविध गतिविधियों में संग्रहालय और संगीत वाद्यों की गैलरी का रखरखाव भी शामिल है। यह संग्रहालय प्रदर्शन कलाओं की समृद्ध विरासत के साथ– साथ देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त संगीत वाद्य को भी दिखाता है। यह संग्रहालय कला विद्वानों और विशषज्ञों के लिए शोध की समाग्री तो प्रदान करता ही है, साथ ही प्रलेखन के लिए सभी स्तर के छात्र वर्ग के लिए और प्रदर्शन कलाओं और संगीत में रूचि रखने वाली साधारण जनता के लिए भी उपयोगी है। इस संग्रह में प्रदर्शन कलाओं की 2000 से भी ज़्यादा कलात्मक वस्तुएं है। इनमें संगीत वाद्य, मुखौटे, कठपुतलियां और शिरोधार्य मुकुट (हैडगियर्स) शामिल हैं।

 

संगीत वाद्यों की गैलरी–“असावरी
संगीत वाद्यों की गैलरी का उद्घाटन प्रख्यात वायलिन गुरू येहूदी मेनुहिन ने 13 फरवरी 1964 में किया था। सुव्यवस्थित संग्रहण वर्ष 1968 में दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शनी से हुआ जहां लगभग 400 लोक और जनजातीय वाद्य प्रदर्शित किए गए। तभी से नियमित रूप से संगीतकारों से और अतिथि-समूहों से उपहार स्वरूप प्राप्त वाद्यों का संग्रहण किया जा रहा है।

इस समय लगभग 600 संगीत वाद्य हैं जिनमें 250 स्थायी रूप से भिन्न-भिन्न वर्गों के संगीत को प्रदर्शित कर रहे हैं।
इन वाद्यों को इस प्रकार श्रेणीबद्ध किया गया है:-
1. विन्ड इन्स्ट्रुमेन्ट (ऐरो फोनिक) इसमें बांसुरी और नागस्वरम को भी शामिल किया गया है।
2. स्ट्रिंग इन्स्ट्रुमेन्ट (कार्डोफोनिक) जिसमें दिलरूबा और वीणा भी सम्मिलित हैं।
3. तालवाद्य (मेम्ब्रानों फोनिक) तबला, मृदंगम और (इडियो फोनिक) बोरताल और घटम इसी श्रेणी के वाद्य हैं।
इन दुर्लभ वाद्यों की श्रेणी में उत्तर भारत का कछवा सितार और तमिलनाडु का गेट्टू वाद्यम् आता है।

मुखौटे
इस गैलरी में भारत के कोने- कोने से प्राप्त मुखौटे लगाए गए हैं। झारखंड के छउ मुखौटे, उत्तर प्रदेश के ज़रीदार मुखौटे और केरल के कृष्णट्टम मुखौटे भी इस गैलरी में प्रदर्शित किए गए हैं।

पुतुल
संग्रहालय में पुतलियों का एक वृहद संग्रह है जिसमें राजस्थान की कठपुतली (धागा पुतुल) पश्चिम बंगाल की वेणीर पुतुल (दस्ताना पुतुल) महाराष्ट्र का कलासूत्री बाहुल्य (धागा पुतुल) आन्ध्र प्रदेश के तोलू बोम्मालाट्टा (छाया पुतुल) और अन्य बहुत से पुतुल संग्रहीत हैं।

प्रदर्शनियां
अकादेमी के संग्रह से संगीत वाद्यों, मुखौटों और पुतुल की बहुत सी प्रदर्शनियां देश-विदेश में लगाई गई हैं। संगीत वाद्यों की प्रदर्शनियों में हाँग-काँग (1979) रोम (1987) और मॉस्को (1987) के नाम उल्लेखनीय हैं। 1968 में दिल्ली में संगीत वाद्यों की प्रदर्शनी के अवसर पर लोक वाद्यों पर एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। फरवरी-मार्च 1993 में इंडिया इंटरनेशनल म्यूज़िक फेस्टिवल के अवसर पर ‘चेंजिंग पर्सपेक्टिव इन म्यूजि़क’ विषय पर एक प्रदर्शनी लगाई गई।
अकादेमी संग्रहालय की इस गैलरी में संगीत वाद्यों और अन्य कलात्मक वस्तुओं की जानकारी शोधकर्ताओं और अन्य कला विशेषज्ञों, आगन्तु्कों के लिए उपलब्ध है। फोटोग्राफी और फिल्मांकन की सुविधा भी उपलब्ध है।
मुखौटे और पुतुल इसी संग्रह का एक सुरक्षित भाग हैं, अकादेमी को पूर्व सूचना देने के बाद ही उन्हें देखा जा सकता है।