१. शीर्षक

इस योजना को संगीत नाटक अकादेमी द्वारा सांस्कृतिक संस्थाओं को दी जाने वाली वित्तीय अनुदान योजना कहा जाएगा

२. उद्देश्य

प्रदर्शनकारी कलाओं जैसे संगीत, नृत्य और नाटकों के प्रोत्साहन में ली ख़ास-ख़ास सांस्कृतिक संस्थाओं को आर्थिक-अनुदान प्रदान करने के लिए संगीत नाटक अकादेमी को अधिकार देना इस योजना का उद्देश्य हैं अर्थात् संगीत, नृत्य और नाटक के क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने के काम में लगी संस्थाओं को वित्तीय सहायता देना और नए नाटकों और नृत्य-नाटिकाओं, आदि की प्रस्तुति को प्रोत्साहित करना |

३. योजना का कार्य क्षेत्र

उपर्युक्त पैरा-२ में बताये गए उद्देश्य को पूरा करने के लिए वार्षिक आधार पर आर्थिक सहायता (i) अध्यापकों को वेतन और छात्रों को छात्रवृति, (ii) कलाकारों को मानदेय और फीस, (iii) नयी प्रस्तुतियों पर होने वाले व्यय, जिसमे किराया, वाद्य-यंत्रों, प्रकाश एवं ध्वनि उपकरणों की खरीद, खर्च और प्रचार पर होने वाला व्यय भी शामिल है, (iv) नियमित आधार पर प्रदर्शनों का खर्च और व्यवस्था पर होने वाले व्यय (अनुदान की कुल राशि का १५% तक प्रशासनिक स्टाफ पर होने वाला व्यय भी शामिल है) को वहन करने के लिए दी जायेगी |

इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रादेशिक क्षेत्रों में लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक नाटकों से जुड़ी संस्थाओं को भी सहायता प्रदान की जायेगी ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी गतिविधियाँ जारी रख सकें | इस योजना द्वारा प्रदर्शनकारी कलाओं के अन्य विशिष्ट क्षेत्रों जैसे समूह-गान और बाल रंगशाला के कार्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा |

इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रादेशिक क्षेत्रों में लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक नाटकों से जुड़ी संस्थाओं को भी सहायता प्रदान की जायेगी ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी गतिविधियाँ जारी रख सकें | इस योजना द्वारा इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रादेशिक क्षेत्रों में लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक नाटकों से जुड़ी संस्थाओं को भी सहायता प्रदान की जायेगी ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी गतिविधियाँ जारी रख सकें | इस योजना द्वारा प्रदर्शनकारी कलाओं के अन्य विशिष्ट क्षेत्रों जैसे समूह-गान और बाल रंगशाला के कार्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा |के अन्य विशिष्ट क्षेत्रों जैसे समूह-गान और बाल रंगशाला के कार्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा |

प्रदर्शनकारी कलाओं के क्षेत्र में अनुसंधान और सर्वेक्षण परियोजनाओं तथा स्टेज और अन्य तकनीकी उपकरणों की खरीद के लिए भी इस योजना के अंतर्गत सहायता प्रदान की जायेगी |

इसके अतिरिक्त इस योजना के अंतर्गत विशेष प्रकार की बहुउपयोगी विशिष्ट परियोजनाओं तथा कलाओं के प्रति जागरूकता लाने के लिए संगीत, नृत्य व नाटक की दुर्लभ/लुप्तप्राय रूपों के उत्सवों/ विशेष कार्यक्रमों/प्रदर्शनियों आही के आयोजन के लिए और विख्यात गुरुओं द्वारा गहन प्रशिक्षण, पुनश्चर्या, कार्यशाला और व्याख्यान प्रदर्शनों आदि के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी |

४. संस्थाओं का चयन

(i) प्राप्त आवेदन-पत्रों के आधार पर संस्थाओं, परियोजनाओं/कार्यक्रमों आदि की एक चयन सूची तैयार की जायेगी | इसके लिए संस्थाओं के कार्यकलाप तथा उनकी प्रतिष्ठा पर विचार किया जाएगा तथा प्रोत्साहित की जाने वाली गतिविधियों को भी ध्यान में रखा जाएगा |

(ii) अकादेमी द्वारा संस्थाओं/व्यक्तियों का चयन सीधा भी किया जाएगा तथा विभिन्न विशेष क्षेत्रों में क्रियान्वित करने के लिए विशिष्ट कार्यक्रम और परियोजनाएं तैयार की जांएगी, जैसे-अल्पकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, बाल रान्ह्शाला और समोह गान को प्रोत्साहन देना, लोक-कलाओं से जुड़ी संस्थाओं को आर्थिक सहायता देना और क्षेत्रीय आधार पर कला उत्सवों का भी आयोजन करना | इनमें से अधिकांश कार्यक्रम सम्बंधित क्षेत्रों में राज्य अकादेमियों /प्रमुख संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किये जायेंगे |

५. चयन करने और अनुदान देने की कार्यप्रणाली

विशेषज्ञों के एक पैनल से गठित अनुदान समिति आवेदन-पत्रों पर विचार करेगी और अनुदान का भुगतान करने के सम्बन्ध में सिफारिश करेगी | अनुदान समिति संगीत, नृत्य और नाटक जैसे विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखेंगी तथा आनुपातिक रूप में अनुदान बांटने का प्रयास करेगी | अनुदान समिति प्रत्येक संस्था के मामले में अनुदान की राशि तय करेगी | अनुदान का उपयोग करने तथा विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने के सम्बन्ध में इस समिति द्वारा विशेष शर्तें और कार्यपद्धतियां निर्धारित की जायेंगी | पूर्ववर्ती पैराग्राफों में निर्धारित लक्ष्यों और मानदंडों को ध्यान में रखते हुए, अनुदान समिति द्वारा संस्थाओं का चयन करते समय उनके आय के स्रोत और व्यय के स्तर की भी जांच की जायेगी | जिन संस्थाओं का वार्षिक व्यय ७.००० रूपए से भी कम है उनको अनुदान मंज़ूर करने के मामले पर सामान्यतया विचार नहीं किया जाएगा | योजना के अंतर्गत वित्तीय अनुदान प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार की अनुयाचना करने पर आवेदक को अयोग्य मन जायेगा |

६. अनुदान के लिय आवेदन-पत्रों पर कार्यवाई करने की प्रक्रिया

(१) वित्तीय अनुदान प्राप्त करने के लिए सभी आवेदन-पत्र इन नियमों के अनुलग्नक में विहित किये गए फॉर्म में होंगे और उसके साथ निम्नलिखित दस्तावेज़ भेजे जाने चाहियें :

(क) संस्था के पदाधिकारियों की सूची;

(ख) जिस वर्ष के लिए आवेदन-पत्र भेजना है उससे पूर्व वित्त वर्ष का पूर्ण आय-व्यय का लेखा-परीक्षित विवरण और तुलनपत्र (उदाहरणार्थ यही आवेदन-पत्र की तारीख ३१.३.२००४ है तो वर्ष २००२-०३ का लेखा-परीक्षित लेखा विवरण आवेदन-पत्र के साथ भेजा जाए |)

(ग) पिछले तीन वर्षों में संस्था को यदि कोई वित्तीय सहायता का भी उल्लेख करें और साथ ही राशि के उपयोग का विवरण भी दें |

(घ) पूर्ववर्ती वर्ष के कार्यकलापों की रिपोर्ट (उदाहरणत: यदि वर्ष २००४-०५ के लिए वित्तीय सहायता हेतु आवेदन किया जाता है तो वर्ष २००३-०४ के कार्यकलापों की रिपोर्ट भेजनी होती है |)

(२) आवेदन पत्र में शुरू की जानी वाली परियोजनाओं का पूरा ब्यौरा होना चाहिए |

(क) प्रशिक्षण कार्यक्रमों के मामले में संस्था द्वारा प्रशिक्षण का स्वरूप और कार्यक्षेत्र, शिक्षण स्टाफ के सदस्यों के नाम और उनकी योग्यताएं तथा प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों की संस्था का विवरण भी दिया जाए | संस्था को वार्षिक रिपोर्ट और वार्षिक परीक्षा के परिणाम भी भेजने होंगे |

(ख) नयी प्रस्तुतियों के सम्बन्ध में प्रस्तुति का अनुमानित व्यय विवरण, नाटक का नाम, निर्देशक का नाम आदि का उल्लेख करना होगा | संस्था को कार्यकलापों का पूरा विवरण और नयी प्रस्तुति सम्बन्धी प्रदर्शनों की पूरी जानकारी देनी होगी |

(ग) सर्वेक्षण और अनुसंधान परियोजनाओं के मामले में सर्वेक्षण और अनुसंधान का स्वरूप, कार्यक्षेत्र और इस सम्बन्ध में की गयी तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति, अपेक्षित उपकरण और अपनाई जाने वाली कार्य-पद्धति का पूरा उल्लेख करना होगा | इस संस्था को सर्वेक्षण और अनुसंधान परियोजनाओं की रिपोर्ट की दो प्रतियां प्रस्तुत करनी होंगी |

(घ) तकनीकी उपकरणों की खरीद के बारे में, संस्था को ध्वनि एवं प्रकाश के विभिन्न उपकरणों के विवरण के साथ-साथ उनके अनुमानित व्यय का ब्यौरा भी देना होगा तथा इसके साथ ही अपेक्षित उपकरणों के उपयोग के स्वरूप का भी उल्लेख करना होगा | संस्था के पास पहले से ही जो भी उपकरणों मौजूद हैं, उनकी भी सूची भी भेजनी होगी |

(३) सहायता के लिए आवेदन-पत्र राज्य अकादेमी के माध्यम से भेजे जाएं अथवा यदि वहां कोई राजकीय अकादेमी न हो तो उस स्थिति में राज्य सरकार के माध्यम से भेजे जाएं ताकि आवेदन-पत्र प्रतिवर्ष, जिस वित्त वर्ष के लिए सहायता चाहिए, उससे पूर्ववर्ती वर्ष के दिसम्बर के अंतिम दिवस तक अवश्य अकादेमी में पहुंच जाएं | वैसे, आवेदन-पत्र की एक अग्रिम प्रति अकादेमी को सीधे भी भेजी जा सकती है |

७. अनुदान देने और उसका लेखा रखने की क्रिया विधि

(i) अनुदान स्वीकृति पत्र के जारी होने के ३० दिन के अन्दर सम्बंधित संस्था से आश्वासन प्रमाण्पत्र के रूप में स्वीकृति इस अकादेमी को अवश्य प्राप्त हो जानी चाहिए, जिसमें प्रस्तावित अनुदान की स्पष्ट शर्तों और राशि का पूरा विवरण दिया गया हो | संस्थाओं की ओर से निर्धारित समय में ऐसा जवाब प्राप्त न होने पर अनुदान सम्बन्धी स्वीकृति पत्र रद्द कर दिया जाएगा और वह अनुदान अन्य संस्थाओं को दे दिया जायेगा |

(ii) अनुदान ७५% और २५% की दो किस्तों में दिया जाएगा | जहां अनुदान पहली बार दिया जाना हो (अर्थात् जहां किसी पिछले अनुदान के बारे में हिसाब अकादेमी को देना बकाया न पड़ा हो) वहां संस्था से आश्वासन प्रमाण-पत्र और प्रस्तावित राशि के लिए स्टाम्प लगी रसीद तथा उक्त प्रयोजन के लिए संस्कृति विभाग से कोई अनुदान न लिए जाने का प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के तुरंत बाद अनुदान की पूरी किस्त दे दी जायेगी |

(iii) जहां पिछले वर्ष (वर्षों) में कोई अनुदान दिया गया हो, वहां चालू वर्ष के अनुदान की ७५% की पहली किस्त निम्नलिखित दस्तावेजों के प्राप्त होने के बाद ही की जायेगी |

(अ) पूर्ववर्ती पैराग्राफ में उल्लिखित आश्वासन प्रमाण-पत्र; और

(ब) पिछले अनुदान (अनुदानों) के लिए संस्था के कीड़ी पदाधिकारी का विधिवत् हस्ताक्षरित उपयोगिता प्रमाण-पत्र, जिसके साथ व्यय का विस्तृत विवरण भी संलग्न हो | चालु वर्ष के अनुदान की २५% की दूसरी किस्त पिछले अनुदानों के सम्बन्ध में उपयोगिता प्रमाण पत्र सनदी लेखाकार (चार्टर्ड अकाउंटेंट) द्वारा विधिवत् प्रतिहस्ताक्षरित प्राप्त होने के बाद ही दी जायेगी | इस उपयोगिता प्रमाणपत्र में अनुदान की शर्तों के अनुसार उपयोगिता के विशेष सन्दर्भ के साथ अनुदान के बारे में उनकी दिनांकित टिप्पणी भी होनी चाहिए और किये गए व्यय का विस्तृत विवरण और पिछले अनुदानों के बारे में लेखा-परीक्षित लेखाओं के विवरण भी संलग्न किये जाने चाहिएं |

(iv ) अनुदान की प्राप्ति के सम्बन्ध में टिकट लगी रसीद देनी होगी |

(v ) सम्बंधित संस्था को अनुदान प्रत्येक वित्त वर्ष की १५ फरवरी से पहले दे दिया जायेगा | पिछले अनुदान (अनुदानों) के सम्बन्ध में समय पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत न कर पाने के कारण जिन संस्थाओं के अनुदान रोक लिए गए हों, उक्त तिथि के तुरंत बाद अनुदान सीमित के अध्यक्ष के निर्णय के अनुसार उसे अन्य संस्थाओं को दे दिया जायेगा और मामले की रिपोर्ट समिति और बोर्ड को उसकी अगली बैठक में दे दी जाएगी |

८. सामान्य

अकादेमी के अधिकारी और अनुदान समिति आदि के सदस्य यथासंभव समय-समय पर निरिक्षण करेंगे | इन अधिकारियों द्वारा भी भेजी गयी रिपोर्टों पर विभिन्न संस्थाओं को अनुदानों का आबंटन करते समय अनुदान-समिति विचार करेगी |

९. व्याख्यात्मक टिपण्णी

इस योजना से सम्बंधित उक्त नियमों में से किसी भी नियम के बारे में कोई संदेह हो जाने की स्थिति में समिति के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा |